Sunday, October 23, 2011
Saturday, September 24, 2011
याद पुरानी
वक़्त रेत की सकल बनाकर
मुट्ठी से यूँ निकल गया,
दाना चुंग मेरे आँगन से
कोई पंछी गुजर गया...
कभी पतंगों के पीछे
गाँव की गलियां छानी थीं,
ठंडी बारिश के ओले खाकर
हमने की मनमानी थी...
शाम ढले कुछ जुगनूं उड़कर
हमको बहुत लुभाते थे,
रात सितारों के नीचे बाबा
किस्से हमें सुनाते थे..
आज ये बारिश गीली भर है
ओले सारे सूख गए,
बाबा की बस याद रह गयी
जुगनूं बुझकर डूब गए...
Sunday, September 11, 2011
Saturday, September 3, 2011
Friday, August 26, 2011
सुकून
आज तूने बहुत रुलाया है
अपनी आग़ोश में..
कुछ अनजाने ख्यालों से..
..ये दिल कुछ बेचैन था,
कौन से वो लम्हे थे..
अफ़सोस के ना जाने,
कि बस-
राह सी बन गयी,
..मेरे क़दमों से
तेरे क़दमों तलक.....
आज तूने बहुत रुलाया है,
..अपनी आग़ोश का
ये सुकून देकर..
Sunday, July 24, 2011
Sunday, June 26, 2011
Saturday, June 18, 2011
Friday, June 10, 2011
रोशनदान
Sunday, May 15, 2011
यादों का मल्हम
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