Thursday, March 29, 2012

रूहें कुछ सपनों की



खुरच के देखो
गुज़रे वक़्त को,
कुछ लाशें मिलेंगी ख़्वाबों की,
रूहें इनकी-
कुछ सवाल करती हैं,
जिनका कोई जवाब नहीं
बस
एक मायूस दिल है..
ये रूहें गुज़रे ख़्वाबों की-
सताती रहेंगी,
जब तलक
मेरी रूह भी
इनमें मिल नहीं जाती..

31 comments:

  1. अधूरे ख्वाब अकसर कांटे बन चुभा करते हैं सीने में.
    वाह!!!
    बहुत सुन्दर...

    अनु

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर रचना ..
    बधाई .

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर ... मार्मिक चित्रण है सपनों का

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

    ReplyDelete
  5. बहुत प्रशंसनीय प्रस्तुति

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर सृजन, बधाई.

    मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारने का कष्ट करें.

    ReplyDelete
  7. Wow.. Just awesome.. Hindi Bhaasha me ek jaadu hai jo dil ko choo jaati hai.. Well written Bijendra:)

    ReplyDelete
  8. अनुपम भाव संयोजन लिए ...बहुत बढि़या प्रस्‍तुति।

    ReplyDelete
  9. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से नव संवत्सर व नवरात्रि की शुभकामनाए।

    ReplyDelete
  10. hello Birju !!
    thanks 4 visiting me and giving me the opportunity to land here :)

    Lovely blog u have..
    very intense emotions u have expressed in above lines.. Loved it !!

    wish to c u more :)

    ReplyDelete
  11. वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,बेहतरीन प्रस्तुति,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,

    ReplyDelete
  12. अतीत यूहीं सालता रहता है ......सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  13. शब्द-शब्द संवेदनाओं से भरी मार्मिक रचना ....
    सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  14. सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  15. हौसला अफजाई का शुक्रिया.. :)

    ReplyDelete