Friday, April 6, 2012

लम्हे, तेरे इंतज़ार के



इंतज़ार में तेरे
लम्हे जो गुज़ारे,
अहमियत उनकी
आज महसूस की है..
इन्ही लम्हों में
तलाश किया मैंने 
तेरे साथ ख़ुद को..
क़ायनात की खूबसूरती में 
तेरे अक्श को देखा
तो कुदरत को
तेरे दामन की दासी पाया..
फिर तमन्ना है जीने की
उन्ही लम्हों को,
शायद
इसी बहाने 
ये उम्र गुज़र जाए..

23 comments:

  1. उन्ही लम्हों को,
    शायद
    इसी बहाने
    ये उम्र गुज़र जाए..भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

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  2. वाह ……………मन के कोमल भावो का बहुत सुन्दर चित्रण किया है…………बेहद शानदार प्रस्तुति।

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    1. Abhaar Bhaskar Bhai..aise hi Hausla Badhate rahiyega hum likhte rahenge.. :)

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  3. सुन्दर सृजन, बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारें, आभारी होऊंगा.

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  4. इंतज़ार में तेरे
    लम्हे जो गुज़ारे,
    अहमियत उनकी
    आज महसूस की है..

    babht achha.......

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  5. फिर तमन्ना है जीने की
    उन्ही लम्हों को,
    शायद
    इसी बहाने
    ये उम्र गुज़र जाए..
    कभी कभी यादे ही जीने का सहारा बन जाती है..
    गहरे भाव लिए रचना....

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  6. इंतज़ार में तेरे
    लम्हे जो गुज़ारे,
    अहमियत उनकी
    आज महसूस की है..
    बहुत खूब...
    सुन्दर दिल को छु लेनेवाली पंक्तिया....

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  7. तेरे अक्श को देखा
    तो कुदरत को
    तेरे दामन की दासी पाया..

    Awesome metaphors u've used..
    beautifully written !!

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  8. वाह!!!!
    इन्ही लम्हों में
    तलाश किया मैंने
    तेरे साथ ख़ुद को.............

    इन्तहा है प्यार की............

    बहुत सुंदर.

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  9. फिर तमन्ना है जीने की
    उन्ही लम्हों को,
    शायद
    इसी बहाने
    ये उम्र गुज़र जाए..

    ...वाह ! बेहतरीन प्रस्तुति....

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  10. इंतज़ार में तेरे
    लम्हे जो गुज़ारे,
    अहमियत उनकी
    आज महसूस की है..

    सच में किसी के इंतजार में गुजरे लम्हों की अहमियत जीवन में सदा ही बनी रहती है ......!

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  11. khwab, ummeede na ho to jeena kaisa.....koi to bahaha ho jeene k liye.

    sunder prastuti.

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