Saturday, January 29, 2011

अतीत


एक अन्जाना ख़्वाब
बरस रहा है आज कहीं,
कुछ मटियाली यादों से
परतें माटी की,
धीरे धीरे गीली होकर
महक रहीं हैं आज कहीं !!

बीते जीवन के कुछ लम्हे

बरसों पहले दफनाये थे,
इस बारिश के गीलेपन से
उन लम्हों के अंकुर,
सौंधी माटी में से उठकर
फूट रहे हैं आज कहीं !!

रंग बिरंगे सपनों से

कुछ शक्लें रंग डाली थीं,
तन्हाई के आलम में
वो धुंधलाई शक्लें,
तस्वीरों के कोनों से
झाँक रहीं हैं आज कहीं !!


Photo Courtesy- Uttam Sikaria
blog: utmsikaria.wordpress.com

11 comments:

  1. गुज़रा जीवन भी कहाँ साथ छोड़ता है.... बहुत सुंदर लिखा

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  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (31/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  3. एक अन्जाना ख़्वाब
    बरस रहा है आज कहीं,
    कुछ मटियाली यादों से
    परतें माटी की,
    धीरे धीरे गीली होकर
    महक रहीं हैं आज कहीं !!

    माटी की सोंधी सोंधी महक जैसी अनुभूति देती हुई -
    सुंदर भावात्मक रचना -

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  4. रंग बिरंगे सपनों से
    कुछ शक्लें रंग डाली थीं,
    तन्हाई के आलम में
    वो धुंधलाई शक्लें,
    तस्वीरों के कोनों से
    झाँक रहीं हैं आज कहीं !!
    bahut hi apne se ehsaas

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  5. Dhnyavaad Monikaji,Vnadana ji, Anupama ji, Rashmi ji.. Protsahan ke liye. :)

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  6. बीते जीवन के कुछ लम्हे
    बरसों पहले दफनाये थे,
    इस बारिश के गीलेपन से
    उन लम्हों के अंकुर,
    सौंधी माटी में से उठकर
    फूट रहे हैं आज कहीं !!
    बहुत सुंदर कविता
    कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग //shiva12877.blogspot.comपर भी अपने एक नज़र डालें

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  7. बहुत सुन्दर रचना ...अतीत की यादों का भावपूर्ण चित्रण !

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  8. This comment has been removed by the author.

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  9. बीते जीवन के कुछ लम्हे
    बरसों पहले दफनाये थे,
    इस बारिश के गीलेपन से
    उन लम्हों के अंकुर,
    सौंधी माटी में से उठकर
    फूट रहे हैं आज कहीं !!


    वाह... b'ful thought !!
    पूरी नज़्म ही ख़ूबसूरत है...

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