Thursday, July 23, 2009

आज कलम उठ जाने दो !!



कई दिनों से सोये मन में
आज लहर बह जाने दो ,
गहन विचारों के मंथन में
आज कलम उठ जाने दो !!

मुझे साज़ का ज्ञान नही है
स्वर लहरों का भान नही है
किंतु म्रदंगी की थापों पर
आज कदम उठ जाने दो ,
गहन विचारों के मंथन में
आज कलम उठ जाने दो !!

अंतर्मन के कोलाहल में
सुलगालो एक चिंगारी
फ़िर उस चिंगारी के ऊपर
आज पवन बह जाने दो ,
गहन विचारों के मंथन में
आज कलम उठ जाने दो !!

10 comments:

  1. sahi hai birju...tune mujhe pehile bhi yeh poem sunayi thi lekin tab last stanza nahi likha tha...good one

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  2. are ye vohi poem hai jo paf vali subah OAT ki seediyo pe likhi thi..

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  3. kya baat hai...mast hai dost...

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  4. nice be ... mast hai maine bhi 2 poems likhi hain hindi mein padhe ke bataiyo yaar kaisi hain

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  5. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 24 -05-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .... शीर्षक और चित्र .

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  6. आपकी कलम यूँ ही उठते रहे...बहुत हीं सुन्दर कविता...

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  7. आपकी कलम उठी
    और एक सुन्दर कविता बन गयी...
    अति सुन्दर रचना:-)

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