Saturday, September 22, 2012

कुछ अश्क ढूंढें हैं

"गुनाहों की कब्र  को खोदकर
कुछ अश्क ढूंढें हैं,
मैले हुए ख़यालों को
दाग लगे कुछ
रूह के टुकड़ों को,
धोना है उनसे आज..."

5 comments:

  1. बहुत ख़ूबसूरत सृजन, बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें , अपना स्नेह प्रदान करें.

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  2. शुभ रात्रि कैसे कहूँ
    मेरे सोने का समय हुआ नहीं !
    अभी तलक दीदार
    आपका मेरी आँखों को छुआ नहीं !
    बैठा हूँ खिड़की पर आंख धरे चुलू भर
    चांदनी की चाह में,
    छुरियों सी लगती हैं अपनी ही सांसें
    दिखा नहीं चाँद ईदगाह में,
    अनार की डाली का
    मधु छत्ता बूंद बूंद अभी चुआ नहीं !
    शुभ रात्रि कैसे कहूँ
    मेरे सोने का समय हुआ नहीं !
    अभी तलक दीदार
    आपका मेरी आँखों को छुआ नहीं !
    शुभ रात्रि का अनछुआ संदेशा आया है
    छज्जे से खिड़की के रास्ते,
    माफिया हवाओं का पहरा है फांसी
    हमारी मुहब्बत के वास्ते,
    अपनी बेकरारी बाया करें कैसे
    ये दिल मैना या सुआ नहीं !
    शुभ रात्रि कैसे कहूँ
    मेरे सोने का समय हुआ नहीं !
    अभी तलक दीदार
    आपका मेरी आँखों को छुआ नहीं !
    मृगछलनाओं के पीछे अनायास भाग कर
    समय सार बीता,
    अँधा अनुसरण एक्लव्य का ठीक नहीं
    अंतर का तरकस ही रीता,
    भौंरे भी चले गये बाग़ से
    रातरानी के पास अभी दुआ नहीं !
    शुभ रात्रि कैसे कहूँ
    मेरे सोने का समय हुआ नहीं !
    अभी तलक दीदार
    आपका मेरी आँखों को छुआ नहीं !

    भोलानाथ
    डा,राधाकृषणन स्कूल के बगल में
    एन,एच-7 कटनी रोड मैहर
    जिला सतना मध्य प्रदेश
    इंडिया-संपर्क-09425885234
    मैहर "

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