Saturday, November 12, 2011

दस्तक



कुछ अधूरे ख़्वाब 
मेरी दबी हुई ख्वाहिशों की डोर थामे,
क़ायनात की ख़ूबसूरती से गुज़रते हुए,
हज़ारों मंज़िलों पर दस्तक देते है...
हर मंजिल 
एक अनजान पहेली की तरह,
मेरे सवालों का जवाब,
एक नए सवाल से देती है...और 
हमेशा की तरह,
उसका मेरे पास
ना ही कोई जवाब होता है और...

ना ही एक नया सवाल...हर मंजिल से गुज़रते गुज़रते,
ख्वाहिशो को दबाती हुई परत,
और सख्त हो जाती है,
और मेरे अधूरे ख़्वाब....
उन सख्ती से दबी हुए,
मेरी ख्वाहिशों की डोर 
थामे,
कायनात की खूबसूरती से गुज़रते हुए,
फिर किसी नयी मंजिल के दरवाज़े पर 
दस्तक देते है....


(Republished after editing)

13 comments:

  1. मेरी ख्वाहिशों की डोर
    थामे,
    कायनात की खूबसूरती से गुज़रते हुए,
    फिर किसी नयी मंजिल के दरवाज़े पर
    दस्तक देते है....बहुत ही अच्छी रचना....

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  2. मेरे सवालों का जवाब,
    एक नए सवाल से देती है...और
    हमेशा की तरह,
    उसका मेरे पास
    ना ही कोई जवाब होता है....

    :)

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  3. हर मंजिल से गुज़रते गुज़रते,
    ख्वाहिशो को दबाती हुई परत,
    और सख्त हो जाती है,

    ....बहुत सुन्दर अहसास...सुन्दर रचना..

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  4. biirju bhai...
    sabse pehle to shukriya mere yahaan aane ke liye...aapki rachna ke baare mein kya kahoon lagta hai ki seedhe dil ki gehraaiyon se likkhi hai...aafareen....aata rahungaa abb...aapka follower bann gaya hoon....

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  5. बहुत खूब लिखा है |बधाई
    आशा

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  6. कायनात की खूबसूरती से गुज़रते हुए,
    फिर किसी नयी मंजिल के दरवाज़े पर
    दस्तक देते है....baut hi accha likha aapne....

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  7. बहुत ही अच्छा लिखा आपने बधाई...
    मेरे ब्लाग में आपका स्वागत है

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  8. सुषमा जी, कैलाश सर, सुरेन्द्र जी, आशा जी, सागर जी, धीरेन्द्र जी, संदीप जी- धन्यवाद.. :)

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  9. बहुत खूबसूरत ख़याल ... ख्वाब वैसे भी मेरा प्रिय विषय है ..

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार

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  10. Very interesting, excellent post. Thanks for posting. I look forward to seeing more from you. Do you run any other sites?

    From everything is canvas

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  11. Thanxx Mr Unlucky..what a strange profile name.. :P ..No i don't run any other site..

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  12. adhure khwabo ki ek puri rachna.....

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