Sunday, June 26, 2011

सालगिरह




फिर वही दिन है,
पहर है, घड़ी है..
फिर कमरे में-
तेरा सुरूर है,
तेरी महक है...
साल भर की-
खुशियों और ग़मों से चुराकर,
कुछ बूँदें बचाई हैं
आंसुओं की...
तेरी यादों पर जमी धूल को
साफ़ करना है,
आज फिर...

7 comments:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (27-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    ReplyDelete
  2. bahut gaharai liye hue sunder prastuti.badhaai sweekaren.

    ReplyDelete
  3. बहुत ख़ूबसूरत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति..

    ReplyDelete