Tuesday, March 29, 2011

चिट्टी तस्वीर



..आधे रंग उड़कर
चिट्टे हुए जाते हैं,
तस्वीर तेरी मेरे ज़ेहन में
ग़ायब होने को है..

..ना जाने कितने लम्हे
गुज़रे तेरी दीद को,
ज़ून भरी हर रात यहाँ
काली होने को है...

..इस आलम में तू आये
तेरी मेहर होगी,
वरना ये शख्सियत भी मेरी
चिट्टी होने को है...



मायने:
चिट्टा- सफ़ेद, ज़ून- चांदनी

Thursday, March 24, 2011

तेरा अंदाज़




सावन में ये रस फुहार
मरुभूमि में स्वर्णकणों सा,
हिमगिर कि चोटी पर चमके
पहली उजली सूर्यकिरण सा,
रखता तुझको सदा ही सुद्रढ़
जीवन की हर उठा पटक में,
निष्कंटक कर देता राहें
गर हो ये तेरे जीवन में..
जिसने है पहचान बनाई
उसे ना तुम खोना यारों,
अंदाज़ कहीं जो गुमा दिया
अंजाम बुरा होगा यारों...

Saturday, March 5, 2011

जायका



यूँ ही ठहाकों में गुज़री ज़िन्दगी
तो क्या गुज़री...
कभी ग़म में भी कटे दिन,
तो जायका बदले.

नज़ारा हर रोज़ आसमां का,

चाँद भी बदलता है..
अमावस का अँधेरा तो जी लूँ,
फिर पूनम का गुलशन खिले,
तो समां बदले...

Tuesday, March 1, 2011

पनाहगाह


विचार कभी
कलम कि डोर से छूटकर
बिछड़ जाते हैं..
कुछ नज़्में
मुकम्मल मुकाम कि तलाश में कभी
भटक जाती हैं..

कुछ ऐसों के लिए
पनाहगाह बनी
मेरी डायरी....
उनके मुकाम कि तलाश
जारी है..
किसी की हो तो ले लो..

Tuesday, February 22, 2011

उन्माद



कुछ बदलता वक़्त,
कुछ जज़्बातों की उफ़ान
की अब,
सपनों की गहराइयाँ कम,
और मंजिलें
छोटी लगती हैं..
हर कदम
एक आस जगाता है,
हर लम्हा ये मन
एक और कदम
चलने को मचलता है..
अरे, अभी सांस है,
चलता रह,
मंज़िल क़रीब है
गर आस है...

Friday, February 18, 2011

तजस्सुम



एक नज़्म की तजस्सुम है...

माहताब से दरिया तलक
सारे किरदार कुरेद लिए,
ज़मीं में सोये कुछ के
कुतबे भी पढ़े,
मुज्तरिबी का आलम
बरकरार है फिर भी...

आज फिर,

एक नज़्म की तजस्सुम है...


Saturday, February 12, 2011

हिजरां


कुछ बारीक सी उमस थी आँखों में,
कुछ तुम्हारे दमकते चेहरे की रौशनी,
तुम्हें देख ना सका
जी भरने तक...

बहुत बड़ा पैमाना था
इस बेमेहर हिजरां का, 

आतश की तरह जला था                           
इसे पीकर
हर पल, हर शब..                          
           

अब जाने ना देना
अपनी आगोश से,
वरना दुनियां एक और
शराबी को देखेगी,
आतश की तरह जलते
पैमाने में डूबे हुए...


(बेमेहर= निर्दयी, हिजरां = जुदाई, आतश = आग, शब = रात)

Tuesday, February 8, 2011

एक मुस्कुराहट


कहीं पुरानी यादों की
कड़वाहट थी,
कुछ ज़ख्मी अहसासों के
निशां थे सीने में,
बीते हुए कल के गुनाहों से
आज की एक दूरी थी
दरम्यान,
आधी साँसें ज़िन्दगी की
खर्च कर दीं
ज़ख्मों की नाप तौल में,
और दूरी बढती रही...

अभी अभी कुछ नन्हे

अहसास जगे हैं,
बीते को बीता समझा
और
दूरी को मैंने एक मुस्कुराहट से मिटा दिया...

Friday, February 4, 2011

ज़िन्दगी एक नज़्म है


कुछ ख़्वाब जो देखे
तो हकीक़त को मैंने जाना,
कुछ कदम जो बढ़ाये
तो मंज़िल को पहचाना..
ग़म की आहट ने मुझको
खुशियों का राग सुनाया,
कुछ ऐसे ही ख़यालों ने
ये अहसास कराया-
"ज़िन्दगी एक नज़्म है
जी ले इसे, और
महसूस कर इस नज़्म को
ज़िन्दगी की तरह.."

Saturday, January 29, 2011

अतीत


एक अन्जाना ख़्वाब
बरस रहा है आज कहीं,
कुछ मटियाली यादों से
परतें माटी की,
धीरे धीरे गीली होकर
महक रहीं हैं आज कहीं !!

बीते जीवन के कुछ लम्हे

बरसों पहले दफनाये थे,
इस बारिश के गीलेपन से
उन लम्हों के अंकुर,
सौंधी माटी में से उठकर
फूट रहे हैं आज कहीं !!

रंग बिरंगे सपनों से

कुछ शक्लें रंग डाली थीं,
तन्हाई के आलम में
वो धुंधलाई शक्लें,
तस्वीरों के कोनों से
झाँक रहीं हैं आज कहीं !!


Photo Courtesy- Uttam Sikaria
blog: utmsikaria.wordpress.com